Monday, July 30, 2018

शहादत दिवस बहुजन नायक शहीद ऊधम सिंह

*31 जुलाई 1940*
*वो थे इसलिए आज हम हैं*
*इतिहास के पन्नों से*
*बहुजन नायक शहीदे आजम,महान क्रांतिकारी,शहीद ऊधम सिंह जी के शहादत दिवस पर भावभिनी श्रद्धांजलि*

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*आओ कम से कम हम लोग मिलकर उस शहीद को अपनी श्रद्धांजलि दें।*
*हे अमर शहीद शहीदे आजम ऊधम सिंह जी  शत-शत नमन तुम्हारी शहादत वीरता,त्याग को !*
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*पंजाब के जालियांवाला बाग हत्याकांड का नाम सुनकर किस भारतीय का खून नहीं खौल उठता. आज भी उस नरसंहार का जिक्र होता है तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं, लेकिन अंग्रेजों की इस क्रूरता का जवाब एक महान क्रांतिकारी ने दिया था, जिसका नाम था सरदार ऊधम सिंह. ये ऐसे वीर सपूत थे जिन्होंने 21 साल बाद ही सही लेकिन अंग्रेजों से उनकी सरजमीं पर ही इस घटना बदला लिया और 1940 में उन्हें आज ही के दिन (31 जुलाई) फांसी दे दी गई थी*
 *धन्य है वो माँ जिसने ऐसे शूरवीर महान देशभक्त क्रांतिकारी शेर को जंन्म दिया*

*जल्द ही मेरी शादी मौत से होगी, यह कहकर शहीद ऊधम सिंह ने फांसी का फंदा चूमा*
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*बहुजन नायक शहीद ऊधम सिंह जी की शहादत को कोटि-कोटि नमन करता हूं मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर*

🔼 *संयोग देखिए कि 31  जुलाई को ही उधम सिंह को फांसी हुई थी और 1974 में इसी तारीख को ब्रिटेन ने इस क्रांतिकारी के अवशेष भारत को सौंपे. उधम सिंह की अस्थियां सम्मान सहित उनके गांव लाई गईं जहां आज उनकी समाधि बनी हुई है.*
*उत्तर भारतीय प्रांत उत्तराखण्ड के एक ज़िले का नाम भी इनके नाम पर उधम सिंह नगर रखा गया है।*
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*आधुनिक भारत को जिन महापुरूषों,शहीदों, महान शख्शियत पर गर्व होना चाहिए, उनमें में से एक है बहुजन नायक महान क्रांतिकारी देशभक्त शहीद ऊधम सिंह जी का नाम*
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*क्या बहुजन होने की वजह से उधम सिंह को नहीं मिला ‘शहीद-ए-आजम’ का दर्जा!*

 *भारत के स्वतंत्रा संग्राम में शहीद उधमसिंह जी एक ऐसा नाम है, जिसने अपने देश और समाज के लोगों की मौत का बदला लंदन जाकर लिया.*
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 *उन्होंने जालियांवाला बाग हत्याकांड के वक्त पंजाब के गवर्नर रहे माइकल ओ डायर को गोलियों से भून डाला.*

 *अपने आप में एक महान और साहसिक कारनामा था लेकिन उनकी जाति चमार उनके गुणगान में बाधा बन गई।*
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*13 मार्च 1940 को रायल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के काक्सटन हाल में बैठक थी जहां माइकल ओ डायर भी वक्ताओं में से एक था। शहीद उधम सिंह जी उस दिन समय से ही बैठक स्थल पर पहुंच गए।*
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*अपनी रिवॉल्वर उन्होंने एक मोटी किताब में छिपा ली। इसके लिए उन्होंने किताब के पृष्ठों को रिवॉल्वर के आकार में उस तरह से काट लिया था, जिससे डायर की जान लेने वाला हथियार आसानी से छिपाया जा सके।*
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*बैठक के बाद दीवार के पीछे से मोर्चा संभालते हुए उधम सिंह ने माइकल ओ डायर पर गोलियां दाग दीं। दो गोलियां माइकल ओ डायर को लगीं जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई। उधम सिंह ने वहां से भागने की कोशिश नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी।*
*इस तरह से शहीद ऊधम सिंह जी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड में मारें गये निर्दोष भाईयों की शहादत का बदला लिया है
उधम सिंह जी के आखिरी शब्द…*
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*बाद में शहीद उधम सिंह जी पर माइकल ओ डायर‘’ की हत्या का मुकदमा चलाया गया. शहीद ऊधम सिंह जी को फांसी की सजा सुनाने से पहले जज ने उनसे कहा, तुम कुछ कहना चाहोगे तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, मुझे कुछ नहीं कहना.* 
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 *मुझे जो करना था मैंने कर दिया. मुझे बिल्कुल अफसोस नहीं है. ‘ड्वायर’ मौत के ही लायक था. इसके कारण ही मेरे देश के लोगों की जान गई. वह असली अपराधी था, इसलिए मैंने उसे खत्म कर दिया. मुझे खुशी है कि मैंने यह काम किया.*
*मुझे मृत्यु का डर नहीं है मैं अपने देश के लिए मर रहा हूं*
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*अंतत: 31 जुलाई 1940 में हंसते-हंसते देश के इस क्रांतिकारी ने फांसी को गले लगा लिया. एक बार पुनः शहीद ऊधम सिंह जी  की शहादत को शत-शत नमन.*
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 *पुराने समय से ही जातिवाद से ग्रसित समाज ने उन्हें इतिहास में भी सीमित कर दिया।* 
 *निश्चित तौर पर यह सब उनकी जाति के कारण ही हुआ। दरअसल वे उस जाति और समाज का हिस्सा नहीं थे जिनके हाथों में कलम रही है*
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 *कलम वालों का इतिहास रहा है कि वे एक तरफा महिमामंडन करते रहे हैं।* 
*तमाम तरह के आडंबरों और झूठों का महिमामंडन करने वाली कलम को असली नायकों के बारे में लिखने में शायद लकवा मार गया।* 
 *लेकिन इस पराक्रमी नायक को बहुजन होने की वजह से इतिहास के पन्नों में जो जगह मिलनी चाहिए थी वह नहीं मिल सकी और महज खानपूर्ति की गई.*
*भारत के इतिहास में कई क्रांतियां हुई हैं, लेकिन इतिहासकारों द्वारा इतिहास को या तो दबाया गया या तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया*
*इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात खत्म करता हूं
शहीद ऊधम सिंह जी के ऐतिहासिक साहस को कोटि कोटि नमन* 
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*

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*भारत के बहुजन,आदिवासी वीर सपूतों एवं वीरांगनाओं की एक लम्बी लिस्ट है, किस-किस की बात करूं, लेकिन बड़े अफ़सोस के साथ कहना चाहूंगा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के आदिवासी नायक एवं बहुजन वीरांगनाओं को शहीदों के रूप में याद ना करना अत्यन्त ही शर्मनाक बात है। जिस प्रकार से आदिवासी नायकों और वीरांगनाओं को मौत दी गई शायद ही कोई उस दर्द का एहसास कर सकता हो। लेकिन उस दर्द में भी आज़ादी की खुशी छुपी हुई थी।*
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*सच अक्सर कड़वा लगता है। इसी लिए सच बोलने वाले भी अप्रिय लगते हैं। सच बोलने वालों*
 *🙏✍🏿 को इतिहास के पन्नों में दबाने का प्रयास किया जाता है, पर सच बोलने का सबसे बड़ा लाभ यही* 
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*🙏✍🏿 है कि वह खुद पहचान कराता है और घोर अंधेरे में भी चमकते तारे की तरह दमका देता है। सच बोलने वाले से लोग भले ही घृणा करें,पर उसके तेज के सामने झुकना ही पड़ता है।*
 *इतिहास के पन्नों पर जमी धूल के नीचेे ऐसे ही एक तेजस्वी क्रांन्तिकारी शहीदे आजम शहीद ऊधम सिंह जी का*
कोटि-कोटि नमन करता हूं मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर
कभी-कभी ख़ामोश घटनाएं ज़्यादा वज़नदार साबित होती हैं।
भारत के इतिहास में कई सामाजिक क्रांतियां हुई हैं, लेकिन इतिहासकारों द्वारा इतिहास को या तो दबाया गया या तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया
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*(साभार-: बहुजन समाज और उसकी राजनिति,मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन समाज का मूवमेंट)*
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कांशीराम साहब जी ने एक एक बहुजन नायक को बहुजन से परिचय कराकर, बहुजन समाज के लिए किए गए कार्य से अवगत कराया। सन 1800 से पहले भारत के बहुजन नायक भारत के बहुजन की पहुँच से दूर थे,
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इसके हमें निश्चय ही  मान्यवर कांशीराम साहब जी का शुक्रगुजार होना चाहिए जिन्होंने इतिहास की क्रब में दफन किए गए बहुजन नायक/नायिकाओं के व्यक्तित्व को सामने लाकर समाज में प्रेरणा स्रोत जगाया।
इसका पूरा श्रेय कांशीराम साहब जी को ही जाता है कि उन्होंने जन जन तक गुमनाम बहुजन नायकों को पहुंचाया, 
मां कांशीराम साहब के बारे में जान कर मुझे भी लगा कि गुमनाम बहुजन नायकों के बारे में लिखा जाए।
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*तमन्ना सच्ची है, तो रास्ते मिल जाते हैं।*
*तमन्ना झूठी है,तो बहाने मिल जाते हैं।।*
*जिसकी जरूरत है रास्ते उसी को खोजने होंगे।*
*निर्धनों का धन उनका अपना संगठन है।*
*ये मेरे बहुजन समाज के लोगों अपने संगठन*
*अपने झंडे को मजबूत करों*
*शिक्षित हो संगठित हो , संघर्ष करो*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏* 
*अम्बेडकरवादी भाईयों, बहनो,को सप्रेम जयभीम! सप्रेम जयभीम !!* 
 *सप्रेम जयभीम !!!*
*डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने* 
 *कहा है* 
 *“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी* 
*शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रे मिलती* 
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏* 
*है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती*
 *है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”* 
*शिक्षित हो संगठित हो , संघर्ष करो*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
*अम्बेडकरवादी भाईयों, बहनो,को सप्रेम जयभीम! सप्रेम जयभीम !!* 
 *सप्रेम जयभीम !!!*
*डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने* 
 *कहा है* 
 *“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी* 
*शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रे मिलती* 
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏* 
*है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती*
 *है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”* 
 *इसलिए मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर* 
 *आप लोगो को इतिहास के उन पन्नों से रूबरू कराने की कोशिश कर रहा हूं* 
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏* 
 *जिन पन्नों से बहुजन समाज का सम्बन्ध है* 
 *जो पन्ने गुमनामी के अंधेरों में खो गए* 
 *और उन पन्नों पर धूल जम गई है,* 
 *उन पन्नों से धूल हटाने की कोशिश कर रहा हूं* 
 *इस मुहिम में आप लोगों मेरा साथ दे, सकते हैं* 
 *✍✍✍✍✍✍✍* 
*पता नहीं क्यूं बहुजन समाज के महापुरुषों के बारे* 
 *कुछ भी लिखने या प्रकाशित करते समय “भारतीय* 
 *जातिवादी मीडिया” की कलम से स्याही सूख जाती है* 
*इतिहासकारों की बड़ी*
 *विडम्बना ये रही है,कि* 
 *उन्होंने बहुजन नायकों के* 
 *योगदान को इतिहास में जगह* *नहीं दी* 
 *इसका सबसे बड़ा कारण* 
 *जातिगत भावना से ग्रस्त होना* 
 *एक सबसे बड़ा कारण है* 
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏* 
 *इसी तरह के तमाम ऐसे बहुजन नायक हैं,* 
 *जिनका योगदान कहीं दर्ज न हो पाने से वो इतिहास के पन्नों में गुम* *हो गए.* 
 *उन तमाम बहुजन नायकों को* 
 *मैं कोटि-कोटि नमन करता हूं*
 *जय भीम       जय भारत* 
              *नमो बुद्धाय* 
  *जय जंगल जय जोहार*
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नमो बुद्धाय 
जय रविदास
जय कबीर
जय भीम
जय नारायण गुरु
जय माता रमाबाई अंबेडकर जी
जय सावित्रीबाई फुले
जय ऊदा देवी पासी जी
जी झलकारी बाई
जय बिरसा मुंडा
जय बाबा घासीदास
जय संत गाडगे बाबा
जय बिरसा मुंडा
जय छत्रपति शाहूजी महाराज
जय शिवाजी महाराज
जय काशीराम साहब
जय मातादीन भंगी जी
जय पेरियार ललई सिंह यादव
*अमित गौतम*
              *क्वारडिनेटर*
                 *बामसेफ*
             *युवा सामाजिक*
                *कार्यकर्ता*           
              *बहुजन समाज*
         
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*

26,जुलाई, आरक्षण दिवस



amitgautambahujansamaj.blogspot.com
26,जुलाई,1902
*इतिहास के पन्नों से*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*116 वें आरक्षण दिवस के अवसर पर सभी बहुजन समाज के शोषित,वंचित, पिछड़े भाईयों को लख-लख बधाईया और हार्दिक मंगलकामनांए*
 *आरक्षण दिवस के अवसर मैं अमित गौतम बहुजन नायक आरक्षण के जनक मशीहा राजा छत्रपति शाहूजी महाराज जी को कोटि-कोटि नमन करता हूं* 
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**समग्र सामाजिक क्रांति के अग्रदूत आरक्षण के* *जनक,बहुजन प्रतिपालक,कुर्मी सचान,पटेल,कटियार,बहुजन समाज के गौरव मशीहा राजा छत्रपति शाहूजी महाराज जी आज से 116 साल पहले भारत की आरक्षण व्यवस्था के जनक छत्रपति शाहू जी महाराज ने 26 जुलाई 1902 को कोल्हापुर स्टेट की सरकारी नौकरियों में शूद्र- अतिशूद्र जातियों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की अधिसूचना जारी की।*
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*बहुजन नायक छत्रपति शाहूजी महाराज का मानना था कि आरक्षण केवल नौकरी का मामला नहीं है बल्कि आरक्षण प्रतिनिधित्व का मामला है। यही वजह है कि छत्रपति शाहूजी महाराज अनुपातिक प्रतिनिधित्व की वकालत किया करते थे।* 
https://t.co/sY2NgHtdFf
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*छत्रपति साहू महाराज ने कोल्हापुर रियायत की नगरपालिका के चुनाव में अछूतों के लिए भी सीटें आरक्षित की थी।यह पहला मौका था की राज्य नगरपालिका का अध्यक्ष शोषित वंचित जाति से चुन कर आया था।* 
 *बहुजन समाज पार्टी की राष्टीय अध्यक्ष,उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री द आयरन लेडी बहन मायावती जी ने अपने शासनकाल में छत्रपति शाहूजी महाराज के नाम पर सन 2000 में जिला बनाया, उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी कानपुर का नाम छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय रखा ,लखनऊ और ग्रेटर नोयडा के स्मारकों मे छत्रपति शाहू जी महाराज की आदमकद मूर्तियां लगवाई।*
*छत्रपति शाहू जी महाराज का कहना था*
*"कल न मै होंऊगा, न आप होंगे, न राजा होंगे, न रजवाड़े होंगे। मगर यह राष्ट्र हमेशा रहेगा और हमे इसको आगे बढ़ाने का काम करते रहना है। समाज मे सबको सम्मान मिले, सभी शिक्षित होकर राष्ट्र के उत्थान मे भागीदार बनें। तभी हमारा जीवन सफल माना जायेगा।"*
*छत्रपति बनने के बाद शाहूजी महाराज ने देखा कि जातिवाद,भेदभाव, पाखडंवाद के कारण समाज का एक वर्ग पिस रहा है। अतः उन्होंने शोषितों, पिछड़ो,वचिंतो के उद्धार के लिए योजना बनाई और उस पर अमल आरंभ किया। छत्रपति शाहूजी महाराज ने वंचितो,शोषितों और पिछड़ी जातियों के लोगों के लिए विद्यालय खोले और छात्रावास बनवाए। इससे उनमें शिक्षा का प्रचार हुआ और सामाजिक स्थिति बदलने लगी।* 
*परन्तु दूषित मानसिकता से ग्रस्ते लोगों ने इसका विरोध किया।* 
वे छत्रपति शाहू जी महाराज को अपना शत्रु समझने लगे। उनके पुरोहित तक ने यह कह दिया कि "आप शूद्र हैं और शूद्र को वेद के मंत्र सुनने का अधिकार नहीं है। छत्रपति साहू महाराज ने इस सारे विरोध का डट कर सामना किया।
सन 1902 के मध्य में छत्रपति शाहू जी महाराज इंग्लैण्ड गए।* उन्होंने वहीं से एक आदेश जारी कर कोल्हापुर रियासत के  शासन-प्रशासन के 50 प्रतिशत पद पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षित कर दिये। 
उच्च शिक्षा के लिए छत्रपति शाहूजी महाराज ने शोषितों वंचितों,पिछड़ो को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। छत्रपति शाहूजी महाराज के प्रयासों का परिणाम उनके शासन में ही दिखने लग गया था। 
स्कूल और कॉलेजों में पढ़ने वाले शोषित वंचित, पिछड़ी जातियों के लड़के-लड़कियों की संख्या में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी। कोल्हापुर के महाराजा के तौर पर साहू महाराज ने सभी जाति और वर्गों के लिए काम किया।
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छत्रपति साहू महाराज के कार्यों से उनके विरोधी भयभीत थे और उन्हें जान से मारने की धमकियाँ दे रहे थे।
 *इस पर छत्रपति शाहूजी महाराज ने कहा था कि- "वे गद्दी छोड़ सकते हैं, मगर सामाजिक प्रतिबद्धता के कार्यों से वे पीछे नहीं हट सकते।"*
*छत्रपति शाहूजी महाराज जी ने 15 जनवरी, 1919 के अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा था कि- "उनके राज्य के किसी भी कार्यालय और गाँव पंचायतों में भी अछूत-पिछड़ी जातियों के साथ समानता का बर्ताव हो, यह सुनिश्चित किया जाये।*
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 *उनका स्पष्ट कहना था कि- "छुआछूत को बर्दास्त नहीं किया जायेगा। उच्च जातियों को दलित जाति के लोगों के साथ मानवीय व्यवहार करना ही चाहिए। जब तक आदमी को आदमी नहीं समझा जायेगा, समाज का चौतरफा विकास असम्भव है।"*
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*15 अप्रैल, 1920 को नासिक में 'उदोजी विद्यार्थी' छात्रावास की नीव का पत्थर रखते हुए साहू महाराज ने कहा था कि- "जातिवाद का अंत ज़रूरी है. जाति को समर्थन देना अपराध है। हमारे समाज की उन्नति में सबसे बड़ी बाधा जाति है। जाति आधारित संगठनों के निहित स्वार्थ होते हैं। निश्चित रूप से ऐसे संगठनों को अपनी शक्ति का उपयोग जातियों को मजबूत करने के बजाय इनके खात्मे में करना चाहिए|"उनका स्पष्ट कहना था कि- "छुआछूत को बर्दास्त नहीं किया जायेगा। उच्च जातियों को दलित जाति के लोगों के साथ मानवीय व्यवहार करना ही चाहिए। जब तक आदमी को आदमी नहीं समझा जायेगा, समाज का चौतरफा विकास असम्भव है।"*
*छत्रपति शाहूजी महाराज हमेशा समानता की बात करतें थे।*
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*आधुनिक भारत के लिए महत्त्वपुर्ण योगदान और देश इंसानों के जीवन में अद्वितीय बदलाव लाने वाले महान शख्सियत परम पूज्य बहुजन नायक छत्रपति शाहूजी महाराज जी के चरणों में मैं कोटि-कोटि नमन करता हूं*
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*भारत वर्ष में बहुजन समाज को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने वाले बहुत से संतो,गुरूओं,और महापुरूषों ने बहुजन समाज को हक दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया है।*
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*जिनमें से एक महामानव सामाजिक क्रांतिकारी छत्रपति शाहूजी महाराज जी भी है ।*
*सदियों से जिन लोगों को अपनी बात कहने का हक नहीं था, हजारों सालों से दबाया गया  उन लोगों को छत्रपति शाहूजी* *महाराज के शासन-प्रशासन ने उन्हें बोलने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी।*
*बहुजन नायक छत्रपति शाहूजी महाराज ऐसे योद्धा, महामानव का नाम है, जिन्होंने शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद की उपेक्षितों को उनका हक दिलाने के लिए जीवन समर्पित कर दिया।*
 *जातिगत भेदभाव पांखडवादको बढाने वालों  के खिलाफ वास्तविक और ठोस लड़ाई छेड़ने वालों में छत्रपति शाहूजी महाराज जी का उल्लेखनीय नाम है।*
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*शोषित समाज को जागृत करने में उनके योगदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।*
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*ऐसे महापुरुष महामानव के चरणों में श्रद्धा के सुमन अर्पित करता हूं। मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर*
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*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
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*ब्रिटिश  कालीन भारत के 10 सर्वाधिक प्रभावशाली राज्यों मे से एक कोल्हापुर के शासक थे, राजऋषि छत्रपति शाहूजी महाराज के शासनकाल मे लिये गये जनकल्याणकारी फैंसलों की गूंज लंदन तक सुनाई पड़ती थी। उनकी लोककल्याणकारी,जन उपयोगी नीतियों से प्रभावित होकर कैंब्रिज यूनीवर्सिटी ने उन्हें डाॅक्टर ऑफ लाॅ ('LLD) की उपाधि से सम्मानित किया। ऐसे महामानव,युगपुरूष बहुजन महानायक को मैं अमित गौतम जंनपद-रमाबाई नगर कानपुर शत-शत नमन करता हूँ*
*तमन्ना सच्ची है, तो रास्ते मिल जाते हैं।*
*तमन्ना झूठी है,तो बहाने मिल जाते हैं।।*
*जिसकी जरूरत है रास्ते उसी को खोजने होंगे।*
*निर्धनों का धन उनका अपना संगठन है।*
*ये मेरे बहुजन समाज के लोगों अपने संगठन*
*अपने झंडे को मजबूत करों*
*शिक्षित हो संगठित हो , संघर्ष करो*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏* 
*अम्बेडकरवादी भाईयों, बहनो,को सप्रेम जयभीम! सप्रेम जयभीम !!* 
 *सप्रेम जयभीम !!!*
*डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने* 
 *कहा है* 
 *“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी* 
*शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रे मिलती* 
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏* 
*है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती*
 *है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”* 
*शिक्षित हो संगठित हो , संघर्ष करो*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
*अम्बेडकरवादी भाईयों, बहनो,को सप्रेम जयभीम! सप्रेम जयभीम !!* 
 *सप्रेम जयभीम !!!*
*डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने* 
 *कहा है* 
 *“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी* 
*शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रे मिलती* 
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏* 
*है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती*
 *है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”* 
 *इसलिए मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर* 
 *आप लोगो को इतिहास के उन पन्नों से रूबरू कराने की कोशिश कर रहा हूं* 
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏* 
 *जिन पन्नों से बहुजन समाज का सम्बन्ध है* 
 *जो पन्ने गुमनामी के अंधेरों में खो गए* 
 *और उन पन्नों पर धूल जम गई है,* 
 *उन पन्नों से धूल हटाने की कोशिश कर रहा हूं* 
 *इस मुहिम में आप लोगों मेरा साथ दे, सकते हैं* 
 *✍✍✍✍✍✍✍* 
*पता नहीं क्यूं बहुजन समाज के महापुरुषों के बारे* 
 *कुछ भी लिखने या प्रकाशित करते समय “भारतीय* 
 *जातिवादी मीडिया” की कलम से स्याही सूख जाती है* 
*इतिहासकारों की बड़ी*
 *विडम्बना ये रही है,कि* 
 *उन्होंने बहुजन नायकों के* 
 *योगदान को इतिहास में जगह* *नहीं दी* 
 *इसका सबसे बड़ा कारण* 
 *जातिगत भावना से ग्रस्त होना* 
 *एक सबसे बड़ा कारण है* 
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏* 
 *इसी तरह के तमाम ऐसे बहुजन नायक हैं,* 
 *जिनका योगदान कहीं दर्ज न हो पाने से वो इतिहास के पन्नों में गुम* *हो गए.* 
 *उन तमाम बहुजन नायकों को* 
 *मैं कोटि-कोटि नमन करता हूं*
 *जय भीम       जय भारत* 
              *नमो बुद्धाय* 
  *जय जंगल जय जोहार*
 ....................................
नमो बुद्धाय 
जय रविदास
जय कबीर
जय भीम
जय नारायण गुरु
जय माता रमाबाई अंबेडकर जी
जय सावित्रीबाई फुले
जय ऊदा देवी पासी जी
जी झलकारी बाई
जय बिरसा मुंडा
जय बाबा घासीदास
जय संत गाडगे बाबा
जय बिरसा मुंडा
जय छत्रपति शाहूजी महाराज
जय शिवाजी महाराज
जय काशीराम साहब
जय मातादीन भंगी जी
जय पेरियार ललई सिंह यादव
*अमित गौतम*
              *क्वारडिनेटर*
                 *बामसेफ*
             *युवा सामाजिक*
                *कार्यकर्ता*           
              *बहुजन समाज*
       
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*

इतिहास के पन्नों से वो थे इसलिए आज हम है

https://t.co/DTRLqFww85
*वो थे इसलिए आज हम है*
*इतिहास के पन्नों से*
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*परम पूज्य बोधिसत्व भारत रत्न बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर जी के जीवन में जून,जुलाई माह में  महत्वपूर्ण घटनाएं / तिथियों के बारे मैं अमित गौतम जंनपद-रमाबाई नगर कानपुर आज कुछ जानकारी देना चाहता हूँ, शायद आप लोग इतिहास के उन पन्नों से वाकिफ न हो*
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*🔼5 जून,1915 अर्थशास्त्र में और समाजशास्त्र, इतिहास दर्शन, मानव विज्ञान और राजनीति के अध्ययन के अन्य विषयों के रूप में एमए परीक्षा प्रमुखता उत्तीर्ण की।*
*🔼जून,1916 लंदन कोलंबिया विश्वविद्यालय पीएचडी के लिए काम पूरा करने के बाद, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस,लंदन में स्नातक छात्र के रूप में शामिल होने के लिए।*
*🔼जून,1917 एमएससी के लिए थीसिस पर काम कर रहे लंदन में एक वर्ष बिताने के बाद भारत लौटें। (ईकॉन) डिग्री। बड़ौदा राज्य द्वारा दी गई छात्रवृत्ति को समाप्त करने के काम के पूरा होने से पहले वापसी की आवश्यकता थी।*
*🔼जून,1924 बॉम्बे हाईकोर्ट में अभ्यास शुरू किया।*
*🔼जून, 1921 थीसिस 'ब्रिटिश भारत में शाही वित्त का प्रांतीय विकेंद्रीकरण' एमएससी के लिए स्वीकार किया गया था।*
*(ईकॉन) द्वारा डिग्री लंदन विश्वविद्यालय*
*🔼जून,1928 प्रोफेसर। सरकारी लॉ कॉलेज बॉम्बे। प्रधान अध्यापक। सरकारी लॉ कॉलेज बॉम्बे।*
*🔼जून1935 डॉ अम्बेडकर को सरकारी लॉ कॉलेज, बॉम्बे के प्रिंसिपल नियुक्त किया गया था। उन्हें प्रोफेसर भी नियुक्त किया गया था*
*🔼20 जून,1946 सिद्धार्थ कॉलेज शुरू हुआ*
*🔼1,जून,1952 डॉ अम्बेडकर बॉम्बे से न्यूयॉर्क गए।*
*🔼15 जून,1952 कोलंबिया यूनिवर्सिटी (यूएसए) ने न्यूयॉर्क में आयोजित अपने द्वि-शताब्दी समारोह विशेष समारोह में एलएलडी की मानद उपाधि प्रदान की।*
*🔼जून,1954 मैसूर के महाराजा ने डॉ अंबेडकर के प्रस्तावित बौद्ध सेमिनरी के लिए बैंगलोर में शुरू होने के लिए 5 एकड़ जमीन दान की*
*🔼 जुलाई,1917 वित्त मंत्री के साथ बड़ौदा के महाराजा गायकवार एचएच के सैन्य सचिव के रूप में नियुक्त किया गया।*
*🔼18 जुलाई,1942 डॉ अम्बेडकर ने नागपुर में अखिल भारतीय डीसी सम्मेलन को संबोधित किया।*
*🔼21,जुलाई,1913 को परम पूज्य बोधिसत्व भारत रत्न  बाबा साहेब  डा भीमराव अम्बेडकर जी ने अमेरिका की न्युयार्क स्थित कोलम्बिया यूनिवर्सिटी में ‘गायकवाड़ स्कॉलर के रूप में दाखिला लिया। यहां एम. ए. के अध्ययन के लिए उन्होंने प्रमुख विषय के तौर पर अर्थशास्त्र और समाज-शास्त्र, राजनीति-शास्त्र, नृवंश-शास्त्र आदि सहायक विषय लिए थे।*
*🔼20 जुलाई,1924 शोषित वर्गों के उत्थान के लिए ,बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना की। सभा के उद्देश्य शिक्षित, आंदोलन, व्यवस्थित थे।*
*🔼 28 जुलाई 1928 को परम पूज्य बोधिसत्व भारत रत्न बाबा साहेब डा. भीमराव आम्बेडकर जी ने मुम्बई विधान परिषद में कारखाना तथा अन्य संस्थानों में कार्यरत महिलाओं को प्रसूति अवकाश की सुविधा वेतन सहित प्रदान करने से संबंधित प्रस्ताव पारित करने की वकालत की*
🔼31,जुलाई,1937
डॉ अम्बेडकर जी का चालीस
गांव रेलवे स्टेशन पर एक भव्य स्वागत हुआ
*🔼22 जुलाई,1940 नेताजी सुभाष चंद्र बोस बॉम्बे में डॉ अम्बेडकर से मुलाकात की।*
*🔼जुलाई,1941,रक्षा सलाहकार समिति  के पद लिए डॉ अम्बेडकर जी नियुक्त किए गए थे।*
*🔼20 जुलाई,1942 डॉ अम्बेडकर श्रम सदस्य के रूप में वाइसराय की कार्यकारी परिषद में शामिल हो गए*
*🔼1944 जुलाई डॉ अंबेडकर ने बॉम्बे में 'पीपुल्स एजुकेशन सोसाइटी' की स्थापना की।*
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*परम पूज्य बोधिसत्व भारत रत्न डा बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर जी आज इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनके विचार आज भी जिंदा है , उनको मानने और जानने वालों की तादाद बहुत तेजी से बढ़ रही है*
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  आधुनिक भारत के लिए
महत्त्वपुर्ण योगदान और देश इंसानों के जीवन में अद्वितीय
बदलाव लाने वाले महान शख्सियत परम पूज्य बोधित्सव
बाबासाहेब डा भीमराव  आंबेडकर जी के चरणों में
*मैं अमित गौतम जंनपद-रमाबाई नगर कानपुर कोटि-कोटि नमन करता हूं*
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*परम पूज्य बोधिसत्व भारत रत्न डा बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर जी ऐसे योद्धा, महामानव का नाम है, जिन्होंने शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद की उपेक्षितों को उनका हक दिलाने के लिए जीवन समर्पित कर दिया।*
ऐसे महापुरुष महामानव के चरणों में श्रद्धा के सुमन अर्पित करता हूं।
 जातिगत भेदभाव पांखडवाद को बढाने वालों  के खिलाफ
 वास्तविक और ठोस लड़ाई छेड़ने वालों में बाबासाहेब जी का उल्लेखनीय नाम है।
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*शोषित समाज को जागृत करने में उनके योगदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।*
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  *डॉ. बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर जी को आज भारत ही नहीं पूरा विश्व भी एक आइडियल व्यक्ति मानता है और उनका गुणगान भी करता है।*
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 किंतु कुछ जातिगत मानसिकता से ग्रस्त लोग डॉ
 बाबासाहेब आंबेडकर जी से नफरत करते हैं, और उनके वर्ग विशेष से जोड़ने की कोशिश करतें ह, लेकिन बाबासाहेब आंबेडकर जी को पढ़ने के बाद ये पता चलता है कि बाबा साहेब आंबेडकर जी ने अंखड भारत के लिए जो किया है शायद वो कोई कर पाए ।
 तो ऐसे थे हमारे डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर।
आज वे हमारे बीच नही है, पर उनके द्वारा किये गए कार्यों, संघर्षों और उनके उपदेशों से

  हमेशा वे हमारे बीच जीवंत है
संविधान के रचयिता और ऐसे
अद्वितीय समाज सुधारक को हमारा कोटि-कोटि नमन
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 आधुनिक भारत के महानतम समाज सुधारक और सच्चे
 महानायक, लेकिन”भारतीय जातिवादी-मानसिकता ने सदा ही इस महापुरुष की उपेक्षा ही की गई |
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  बड़े ही दुर्भाग्य की बात रही है की भारत में हमेशा से ही जाति विशेष व  वर्ग विशेष के नेताओं और उनके कार्यों को स्कूल-कालेजों की बहुत सी किताबें में और अन्य माध्यम से जगह मिली और उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर प्रचारित किया जाता रहा |
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 मगर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे महान-लोगों के महान कार्यों को चित्रित करना किसी को नहीं सिखाया गया |
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मैंने अपने स्कूल के दिनों में अम्बेडकर जी के बारे में ऐसा कभी नहीं पढ़ा |
 पढ़ा तो केवल-“अम्बेडकर – भारतीय कानून के पिता”|
 बिल्कुल सच है ऐसे महान व्यक्तित्व के बारे में कुछ भी लिखने या प्रकाशित करते समय”भारतीय जातिवादी मीडिया”की कलम से
 स्याही सूख जाती है ..
जल्द ही भारत वर्ष के जनमानस के मन में परिवर्तन आयेगा और बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के बारे अपने ज्ञान को व्यापक किया जाए।
भारत में शायद ही कोई दूसरा व्यक्ति ऐसा हो, जिसने देश के निर्माण,उत्थान और प्रगति के लिए थोड़े समय में इतना कुछ कार्य किया हो, जितना बाबासाहेब आंबेडकर जी ने किया है और शायद ही कोई दूसरा व्यक्ति हो, जो निंदा, आलोचनाओं आदि का उतना शिकार हुआ हो,
जितना बाबासाहेब आंबेडकर जी हुए थे।
परंतु यह भी सत्य है कि निंदा, आलोचना और विरोध के बावजूद उनका चरित्र,उनकी महानता,उनका व्यक्तित्व उभरता और निखरता हुआ चला गया ।
बाबासाहेब आंबेडकर जी ने भारतीय संविधान के तहत कमजोर तबके के लोगों को जो कानूनी हक दिलाये है। इसके लिए बाबा साहेब आंबेडकर जी को कदम-कदम पर काफी संघर्ष करना पड़ा था।
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*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
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 परमपूज्य बोधिसत्व भारत-रत्न बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी ने वह कर दिखाया जो
 उस दौर में सोच पाना भी मुश्किल था...
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 परमपूज्य बोधिसत्व भारत-रत्न बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के संघर्षों में सबसे बड़ा योगदान माता रमाबाई अंबेडकर जी का रहा है।
 प्रत्येक महापुरुष की सफलता के पीछे उसकी जीवनसंगिनी का बहुत बड़ा हाथ होता है !
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जीवनसंगिनी का त्याग और सहयोग अगर न हो तो शायद,
वह व्यक्ति, महापुरुष ही नहीं बन पाता !
माता रमाबाई अंबेडकर जी इसी तरह के त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति थी !
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अक्सर महापुरुष की दमक के सामने उसका घर-परिवार और जीवनसंगिनी सब पीछे छूट जाते हैं क्योंकि, इतिहास लिखने वालों की नजर महापुरुष पर केन्द्रित होती है
यही कारण है कि माता रमाबाई अंबेडकर जी के बारे में ज्यादा
कुछ नहीं लिखा गया है।

 ऐसे महान क्रांतिकारी वीरांगना माता, को मेरा नीला सलाम
🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏
 *आज हमें अगर कहीं भी खड़े होकर अपने विचारों की अभिव्यक्ति करने की आजादी है।*
*समानता का अधिकार है तो यह सिर्फ और सिर्फ परमपूज्य बाबासाहेब आंबेडकर जी के संघर्षों से मुमकिन हो सका है.*
*भारत वर्ष का जनमानस सदैव बाबा साहेब डा भीमराव अंबेडकर जी का कृतज्ञ रहेगा.*
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*भारत के बहुजन,आदिवासी वीर सपूतों एवं वीरांगनाओं की एक लम्बी लिस्ट है, किस-किस की बात करूं, लेकिन बड़े अफ़सोस के साथ कहना चाहूंगा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के आदिवासी नायक एवं बहुजन वीरांगनाओं को शहीदों के रूप में याद ना करना अत्यन्त ही शर्मनाक बात है। जिस प्रकार से आदिवासी नायकों और वीरांगनाओं को मौत दी गई शायद ही कोई उस दर्द का एहसास कर सकता हो। लेकिन उस दर्द में भी आज़ादी की खुशी छुपी हुई थी।*
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सच अक्सर कड़वा लगता है। इसी लिए सच बोलने वाले भी अप्रिय लगते हैं। सच बोलने वालों
 *🙏✍🏿 को इतिहास के पन्नों में दबाने का प्रयास किया जाता है, पर सच बोलने का सबसे बड़ा लाभ यही*

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*🙏✍🏿 है कि वह खुद पहचान कराता है और घोर अंधेरे में भी चमकते तारे की तरह दमका देता है। सच बोलने वाले से लोग भले ही घृणा करें,पर*
*उसके तेज के सामने झुकना ही पड़ता है। इतिहास के पन्नों पर जमी धूल के नीचेे ऐसे ही एक तेजस्वी क्रांन्तिकारी शख्शियत परमपूज्य बोधिसत्व भारत रत्न बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी का*
*कोटि-कोटि नमन करता हूं मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर*
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कभी-कभी ख़ामोश घटनाएं
ज़्यादा वज़नदार साबित होती हैं।
भारत के इतिहास में कई
सामाजिक क्रांतियां हुई हैं,
लेकिन इतिहासकारों द्वारा इतिहास को या तो दबाया गया या तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया*

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इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात खत्म करता हूं।
सामाजिक न्याय के पुरोधा तेजस्वी क्रांन्तिकारी शख्शियत परमपूज्य बोधिसत्व भारत रत्न बाबासाहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं
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*(साभार-: बहुजन समाज और उसकी राजनिति,मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन समाज का मूवमेंट,दलित दस्तक)*
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*कांशीराम साहब जी,बहन मायावती जी ने एक एक बहुजन नायक को बहुजन से परिचय कराकर, बहुजन समाज के लिए किए गए कार्य से अवगत कराया। सन 1800 से पहले भारत के बहुजन नायक भारत के बहुजन की पहुँच से दूर थे,*
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*इसके हमें निश्चय ही  मान्यवर कांशीराम साहब जी,बहन मायावती जी का शुक्रगुजार होना चाहिए जिन्होंने इतिहास की क्रब में दफन किए गए बहुजन नायक/नायिकाओं के व्यक्तित्व को सामने लाकर समाज में प्रेरणा स्रोत जगाया*
*इसका पूरा श्रेय कांशीराम साहब जी को ही जाता है कि उन्होंने जन जन तक गुमनाम बहुजन नायकों को पहुंचाया, मां कांशीराम साहब के बारे में जान कर मुझे भी लगा कि गुमनाम बहुजन नायकों के बारे में लिखा जाए।*
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*तमन्ना सच्ची है, तो रास्ते मिल जाते हैं।*
*तमन्ना झूठी है,तो बहाने मिल जाते हैं।।*
*जिसकी जरूरत है रास्ते उसी को खोजने होंगे।*
*निर्धनों का धन उनका अपना संगठन है।*
*ये मेरे बहुजन समाज के लोगों अपने संगठन*
*अपने झंडे को मजबूत करों*
*शिक्षित हो संगठित हो , संघर्ष करो*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*अम्बेडकरवादी भाईयों, बहनो,को सप्रेम जयभीम! सप्रेम जयभीम !!*
 *सप्रेम जयभीम !!!*
*डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने*
 *कहा है*
 *“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी*
*शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रे मिलती*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती*
 *है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”*
*शिक्षित हो संगठित हो , संघर्ष करो*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
*अम्बेडकरवादी भाईयों, बहनो,को सप्रेम जयभीम! सप्रेम जयभीम !!*
 *सप्रेम जयभीम !!!*
*डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने*
 *कहा है*
 *“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी*
*शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रे मिलती*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती*
 *है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”*
 *इसलिए मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर*
 *आप लोगो को इतिहास के उन पन्नों से रूबरू कराने की कोशिश कर रहा हूं*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
 *जिन पन्नों से बहुजन समाज का सम्बन्ध है*
 *जो पन्ने गुमनामी के अंधेरों में खो गए*
 *और उन पन्नों पर धूल जम गई है,*
 *उन पन्नों से धूल हटाने की कोशिश कर रहा हूं*
 *इस मुहिम में आप लोगों मेरा साथ दे, सकते हैं*
 *✍✍✍✍✍✍✍*
*पता नहीं क्यूं बहुजन समाज के महापुरुषों के बारे*
 *कुछ भी लिखने या प्रकाशित करते समय “भारतीय*
 *जातिवादी मीडिया” की कलम से स्याही सूख जाती है*
*इतिहासकारों की बड़ी*
 *विडम्बना ये रही है,कि*
 *उन्होंने बहुजन नायकों के*
 *योगदान को इतिहास में जगह* *नहीं दी*
 *इसका सबसे बड़ा कारण*
 *जातिगत भावना से ग्रस्त होना*
 *एक सबसे बड़ा कारण है*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
 *इसी तरह के तमाम ऐसे बहुजन नायक हैं,*
 *जिनका योगदान कहीं दर्ज न हो पाने से वो इतिहास के पन्नों में गुम* *हो गए.*
 *उन तमाम बहुजन नायकों को*
 *मैं कोटि-कोटि नमन करता हूं*
 *जय भीम       जय भारत*
              *नमो बुद्धाय*
  *जय जंगल जय जोहार*
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नमो बुद्धाय
जय रविदास
जय कबीर
जय भीम
जय नारायण गुरु
जय माता रमाबाई अंबेडकर जी
जय सावित्रीबाई फुले
जय ऊदा देवी पासी जी
जी झलकारी बाई
जय बिरसा मुंडा
जय बाबा घासीदास
जय संत गाडगे बाबा
जय बिरसा मुंडा
जय छत्रपति शाहूजी महाराज
जय शिवाजी महाराज
जय काशीराम साहब
जय मातादीन भंगी जी
जय पेरियार ललई सिंह यादवसेव
*अमित गौतम*
              *क्वारडिनेटर*
                 *बामसेफ*
             *युवा सामाजिक*
                *कार्यकर्ता*         
              *बहुजन समाज*
           *सम्पर्क सूत्र-9452963593*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*