*31 जुलाई 1940*
*वो थे इसलिए आज हम हैं*
*इतिहास के पन्नों से*
*बहुजन नायक शहीदे आजम,महान क्रांतिकारी,शहीद ऊधम सिंह जी के शहादत दिवस पर भावभिनी श्रद्धांजलि*
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*आओ कम से कम हम लोग मिलकर उस शहीद को अपनी श्रद्धांजलि दें।*
*हे अमर शहीद शहीदे आजम ऊधम सिंह जी शत-शत नमन तुम्हारी शहादत वीरता,त्याग को !*
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*पंजाब के जालियांवाला बाग हत्याकांड का नाम सुनकर किस भारतीय का खून नहीं खौल उठता. आज भी उस नरसंहार का जिक्र होता है तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं, लेकिन अंग्रेजों की इस क्रूरता का जवाब एक महान क्रांतिकारी ने दिया था, जिसका नाम था सरदार ऊधम सिंह. ये ऐसे वीर सपूत थे जिन्होंने 21 साल बाद ही सही लेकिन अंग्रेजों से उनकी सरजमीं पर ही इस घटना बदला लिया और 1940 में उन्हें आज ही के दिन (31 जुलाई) फांसी दे दी गई थी*
*धन्य है वो माँ जिसने ऐसे शूरवीर महान देशभक्त क्रांतिकारी शेर को जंन्म दिया*
*जल्द ही मेरी शादी मौत से होगी, यह कहकर शहीद ऊधम सिंह ने फांसी का फंदा चूमा*
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*बहुजन नायक शहीद ऊधम सिंह जी की शहादत को कोटि-कोटि नमन करता हूं मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर*
🔼 *संयोग देखिए कि 31 जुलाई को ही उधम सिंह को फांसी हुई थी और 1974 में इसी तारीख को ब्रिटेन ने इस क्रांतिकारी के अवशेष भारत को सौंपे. उधम सिंह की अस्थियां सम्मान सहित उनके गांव लाई गईं जहां आज उनकी समाधि बनी हुई है.*
*उत्तर भारतीय प्रांत उत्तराखण्ड के एक ज़िले का नाम भी इनके नाम पर उधम सिंह नगर रखा गया है।*
...........................................
*आधुनिक भारत को जिन महापुरूषों,शहीदों, महान शख्शियत पर गर्व होना चाहिए, उनमें में से एक है बहुजन नायक महान क्रांतिकारी देशभक्त शहीद ऊधम सिंह जी का नाम*
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*क्या बहुजन होने की वजह से उधम सिंह को नहीं मिला ‘शहीद-ए-आजम’ का दर्जा!*
*भारत के स्वतंत्रा संग्राम में शहीद उधमसिंह जी एक ऐसा नाम है, जिसने अपने देश और समाज के लोगों की मौत का बदला लंदन जाकर लिया.*
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*उन्होंने जालियांवाला बाग हत्याकांड के वक्त पंजाब के गवर्नर रहे माइकल ओ डायर को गोलियों से भून डाला.*
*अपने आप में एक महान और साहसिक कारनामा था लेकिन उनकी जाति चमार उनके गुणगान में बाधा बन गई।*
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*13 मार्च 1940 को रायल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के काक्सटन हाल में बैठक थी जहां माइकल ओ डायर भी वक्ताओं में से एक था। शहीद उधम सिंह जी उस दिन समय से ही बैठक स्थल पर पहुंच गए।*
...........................................
*अपनी रिवॉल्वर उन्होंने एक मोटी किताब में छिपा ली। इसके लिए उन्होंने किताब के पृष्ठों को रिवॉल्वर के आकार में उस तरह से काट लिया था, जिससे डायर की जान लेने वाला हथियार आसानी से छिपाया जा सके।*
...........................................
*बैठक के बाद दीवार के पीछे से मोर्चा संभालते हुए उधम सिंह ने माइकल ओ डायर पर गोलियां दाग दीं। दो गोलियां माइकल ओ डायर को लगीं जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई। उधम सिंह ने वहां से भागने की कोशिश नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी।*
*इस तरह से शहीद ऊधम सिंह जी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड में मारें गये निर्दोष भाईयों की शहादत का बदला लिया है
उधम सिंह जी के आखिरी शब्द…*
...........................................
*बाद में शहीद उधम सिंह जी पर माइकल ओ डायर‘’ की हत्या का मुकदमा चलाया गया. शहीद ऊधम सिंह जी को फांसी की सजा सुनाने से पहले जज ने उनसे कहा, तुम कुछ कहना चाहोगे तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, मुझे कुछ नहीं कहना.*
...........................................
*मुझे जो करना था मैंने कर दिया. मुझे बिल्कुल अफसोस नहीं है. ‘ड्वायर’ मौत के ही लायक था. इसके कारण ही मेरे देश के लोगों की जान गई. वह असली अपराधी था, इसलिए मैंने उसे खत्म कर दिया. मुझे खुशी है कि मैंने यह काम किया.*
*मुझे मृत्यु का डर नहीं है मैं अपने देश के लिए मर रहा हूं*
...........................................
*अंतत: 31 जुलाई 1940 में हंसते-हंसते देश के इस क्रांतिकारी ने फांसी को गले लगा लिया. एक बार पुनः शहीद ऊधम सिंह जी की शहादत को शत-शत नमन.*
...........................................
*पुराने समय से ही जातिवाद से ग्रसित समाज ने उन्हें इतिहास में भी सीमित कर दिया।*
*निश्चित तौर पर यह सब उनकी जाति के कारण ही हुआ। दरअसल वे उस जाति और समाज का हिस्सा नहीं थे जिनके हाथों में कलम रही है*
...........................................
*कलम वालों का इतिहास रहा है कि वे एक तरफा महिमामंडन करते रहे हैं।*
*तमाम तरह के आडंबरों और झूठों का महिमामंडन करने वाली कलम को असली नायकों के बारे में लिखने में शायद लकवा मार गया।*
*लेकिन इस पराक्रमी नायक को बहुजन होने की वजह से इतिहास के पन्नों में जो जगह मिलनी चाहिए थी वह नहीं मिल सकी और महज खानपूर्ति की गई.*
*भारत के इतिहास में कई क्रांतियां हुई हैं, लेकिन इतिहासकारों द्वारा इतिहास को या तो दबाया गया या तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया*
*इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात खत्म करता हूं
शहीद ऊधम सिंह जी के ऐतिहासिक साहस को कोटि कोटि नमन*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
...........................................
*भारत के बहुजन,आदिवासी वीर सपूतों एवं वीरांगनाओं की एक लम्बी लिस्ट है, किस-किस की बात करूं, लेकिन बड़े अफ़सोस के साथ कहना चाहूंगा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के आदिवासी नायक एवं बहुजन वीरांगनाओं को शहीदों के रूप में याद ना करना अत्यन्त ही शर्मनाक बात है। जिस प्रकार से आदिवासी नायकों और वीरांगनाओं को मौत दी गई शायद ही कोई उस दर्द का एहसास कर सकता हो। लेकिन उस दर्द में भी आज़ादी की खुशी छुपी हुई थी।*
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*सच अक्सर कड़वा लगता है। इसी लिए सच बोलने वाले भी अप्रिय लगते हैं। सच बोलने वालों*
*🙏✍🏿 को इतिहास के पन्नों में दबाने का प्रयास किया जाता है, पर सच बोलने का सबसे बड़ा लाभ यही*
...........................................
*🙏✍🏿 है कि वह खुद पहचान कराता है और घोर अंधेरे में भी चमकते तारे की तरह दमका देता है। सच बोलने वाले से लोग भले ही घृणा करें,पर उसके तेज के सामने झुकना ही पड़ता है।*
*इतिहास के पन्नों पर जमी धूल के नीचेे ऐसे ही एक तेजस्वी क्रांन्तिकारी शहीदे आजम शहीद ऊधम सिंह जी का*
कोटि-कोटि नमन करता हूं मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर
कभी-कभी ख़ामोश घटनाएं ज़्यादा वज़नदार साबित होती हैं।
भारत के इतिहास में कई सामाजिक क्रांतियां हुई हैं, लेकिन इतिहासकारों द्वारा इतिहास को या तो दबाया गया या तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया
...........................................
*(साभार-: बहुजन समाज और उसकी राजनिति,मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन समाज का मूवमेंट)*
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कांशीराम साहब जी ने एक एक बहुजन नायक को बहुजन से परिचय कराकर, बहुजन समाज के लिए किए गए कार्य से अवगत कराया। सन 1800 से पहले भारत के बहुजन नायक भारत के बहुजन की पहुँच से दूर थे,
...........................................
इसके हमें निश्चय ही मान्यवर कांशीराम साहब जी का शुक्रगुजार होना चाहिए जिन्होंने इतिहास की क्रब में दफन किए गए बहुजन नायक/नायिकाओं के व्यक्तित्व को सामने लाकर समाज में प्रेरणा स्रोत जगाया।
इसका पूरा श्रेय कांशीराम साहब जी को ही जाता है कि उन्होंने जन जन तक गुमनाम बहुजन नायकों को पहुंचाया,
मां कांशीराम साहब के बारे में जान कर मुझे भी लगा कि गुमनाम बहुजन नायकों के बारे में लिखा जाए।
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*तमन्ना सच्ची है, तो रास्ते मिल जाते हैं।*
*तमन्ना झूठी है,तो बहाने मिल जाते हैं।।*
*जिसकी जरूरत है रास्ते उसी को खोजने होंगे।*
*निर्धनों का धन उनका अपना संगठन है।*
*ये मेरे बहुजन समाज के लोगों अपने संगठन*
*अपने झंडे को मजबूत करों*
*शिक्षित हो संगठित हो , संघर्ष करो*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*अम्बेडकरवादी भाईयों, बहनो,को सप्रेम जयभीम! सप्रेम जयभीम !!*
*सप्रेम जयभीम !!!*
*डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने*
*कहा है*
*“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी*
*शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रे मिलती*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती*
*है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”*
*शिक्षित हो संगठित हो , संघर्ष करो*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
*अम्बेडकरवादी भाईयों, बहनो,को सप्रेम जयभीम! सप्रेम जयभीम !!*
*सप्रेम जयभीम !!!*
*डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने*
*कहा है*
*“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी*
*शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रे मिलती*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती*
*है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”*
*इसलिए मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर*
*आप लोगो को इतिहास के उन पन्नों से रूबरू कराने की कोशिश कर रहा हूं*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*जिन पन्नों से बहुजन समाज का सम्बन्ध है*
*जो पन्ने गुमनामी के अंधेरों में खो गए*
*और उन पन्नों पर धूल जम गई है,*
*उन पन्नों से धूल हटाने की कोशिश कर रहा हूं*
*इस मुहिम में आप लोगों मेरा साथ दे, सकते हैं*
*✍✍✍✍✍✍✍*
*पता नहीं क्यूं बहुजन समाज के महापुरुषों के बारे*
*कुछ भी लिखने या प्रकाशित करते समय “भारतीय*
*जातिवादी मीडिया” की कलम से स्याही सूख जाती है*
*इतिहासकारों की बड़ी*
*विडम्बना ये रही है,कि*
*उन्होंने बहुजन नायकों के*
*योगदान को इतिहास में जगह* *नहीं दी*
*इसका सबसे बड़ा कारण*
*जातिगत भावना से ग्रस्त होना*
*एक सबसे बड़ा कारण है*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*इसी तरह के तमाम ऐसे बहुजन नायक हैं,*
*जिनका योगदान कहीं दर्ज न हो पाने से वो इतिहास के पन्नों में गुम* *हो गए.*
*उन तमाम बहुजन नायकों को*
*मैं कोटि-कोटि नमन करता हूं*
*जय भीम जय भारत*
*नमो बुद्धाय*
*जय जंगल जय जोहार*
....................................
नमो बुद्धाय
जय रविदास
जय कबीर
जय भीम
जय नारायण गुरु
जय माता रमाबाई अंबेडकर जी
जय सावित्रीबाई फुले
जय ऊदा देवी पासी जी
जी झलकारी बाई
जय बिरसा मुंडा
जय बाबा घासीदास
जय संत गाडगे बाबा
जय बिरसा मुंडा
जय छत्रपति शाहूजी महाराज
जय शिवाजी महाराज
जय काशीराम साहब
जय मातादीन भंगी जी
जय पेरियार ललई सिंह यादव
*अमित गौतम*
*क्वारडिनेटर*
*बामसेफ*
*युवा सामाजिक*
*कार्यकर्ता*
*बहुजन समाज*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*वो थे इसलिए आज हम हैं*
*इतिहास के पन्नों से*
*बहुजन नायक शहीदे आजम,महान क्रांतिकारी,शहीद ऊधम सिंह जी के शहादत दिवस पर भावभिनी श्रद्धांजलि*
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*आओ कम से कम हम लोग मिलकर उस शहीद को अपनी श्रद्धांजलि दें।*
*हे अमर शहीद शहीदे आजम ऊधम सिंह जी शत-शत नमन तुम्हारी शहादत वीरता,त्याग को !*
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*पंजाब के जालियांवाला बाग हत्याकांड का नाम सुनकर किस भारतीय का खून नहीं खौल उठता. आज भी उस नरसंहार का जिक्र होता है तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं, लेकिन अंग्रेजों की इस क्रूरता का जवाब एक महान क्रांतिकारी ने दिया था, जिसका नाम था सरदार ऊधम सिंह. ये ऐसे वीर सपूत थे जिन्होंने 21 साल बाद ही सही लेकिन अंग्रेजों से उनकी सरजमीं पर ही इस घटना बदला लिया और 1940 में उन्हें आज ही के दिन (31 जुलाई) फांसी दे दी गई थी*
*धन्य है वो माँ जिसने ऐसे शूरवीर महान देशभक्त क्रांतिकारी शेर को जंन्म दिया*
*जल्द ही मेरी शादी मौत से होगी, यह कहकर शहीद ऊधम सिंह ने फांसी का फंदा चूमा*
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*बहुजन नायक शहीद ऊधम सिंह जी की शहादत को कोटि-कोटि नमन करता हूं मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर*
🔼 *संयोग देखिए कि 31 जुलाई को ही उधम सिंह को फांसी हुई थी और 1974 में इसी तारीख को ब्रिटेन ने इस क्रांतिकारी के अवशेष भारत को सौंपे. उधम सिंह की अस्थियां सम्मान सहित उनके गांव लाई गईं जहां आज उनकी समाधि बनी हुई है.*
*उत्तर भारतीय प्रांत उत्तराखण्ड के एक ज़िले का नाम भी इनके नाम पर उधम सिंह नगर रखा गया है।*
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*आधुनिक भारत को जिन महापुरूषों,शहीदों, महान शख्शियत पर गर्व होना चाहिए, उनमें में से एक है बहुजन नायक महान क्रांतिकारी देशभक्त शहीद ऊधम सिंह जी का नाम*
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*क्या बहुजन होने की वजह से उधम सिंह को नहीं मिला ‘शहीद-ए-आजम’ का दर्जा!*
*भारत के स्वतंत्रा संग्राम में शहीद उधमसिंह जी एक ऐसा नाम है, जिसने अपने देश और समाज के लोगों की मौत का बदला लंदन जाकर लिया.*
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*उन्होंने जालियांवाला बाग हत्याकांड के वक्त पंजाब के गवर्नर रहे माइकल ओ डायर को गोलियों से भून डाला.*
*अपने आप में एक महान और साहसिक कारनामा था लेकिन उनकी जाति चमार उनके गुणगान में बाधा बन गई।*
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*13 मार्च 1940 को रायल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के काक्सटन हाल में बैठक थी जहां माइकल ओ डायर भी वक्ताओं में से एक था। शहीद उधम सिंह जी उस दिन समय से ही बैठक स्थल पर पहुंच गए।*
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*अपनी रिवॉल्वर उन्होंने एक मोटी किताब में छिपा ली। इसके लिए उन्होंने किताब के पृष्ठों को रिवॉल्वर के आकार में उस तरह से काट लिया था, जिससे डायर की जान लेने वाला हथियार आसानी से छिपाया जा सके।*
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*बैठक के बाद दीवार के पीछे से मोर्चा संभालते हुए उधम सिंह ने माइकल ओ डायर पर गोलियां दाग दीं। दो गोलियां माइकल ओ डायर को लगीं जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई। उधम सिंह ने वहां से भागने की कोशिश नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी।*
*इस तरह से शहीद ऊधम सिंह जी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड में मारें गये निर्दोष भाईयों की शहादत का बदला लिया है
उधम सिंह जी के आखिरी शब्द…*
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*बाद में शहीद उधम सिंह जी पर माइकल ओ डायर‘’ की हत्या का मुकदमा चलाया गया. शहीद ऊधम सिंह जी को फांसी की सजा सुनाने से पहले जज ने उनसे कहा, तुम कुछ कहना चाहोगे तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, मुझे कुछ नहीं कहना.*
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*मुझे जो करना था मैंने कर दिया. मुझे बिल्कुल अफसोस नहीं है. ‘ड्वायर’ मौत के ही लायक था. इसके कारण ही मेरे देश के लोगों की जान गई. वह असली अपराधी था, इसलिए मैंने उसे खत्म कर दिया. मुझे खुशी है कि मैंने यह काम किया.*
*मुझे मृत्यु का डर नहीं है मैं अपने देश के लिए मर रहा हूं*
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*अंतत: 31 जुलाई 1940 में हंसते-हंसते देश के इस क्रांतिकारी ने फांसी को गले लगा लिया. एक बार पुनः शहीद ऊधम सिंह जी की शहादत को शत-शत नमन.*
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*पुराने समय से ही जातिवाद से ग्रसित समाज ने उन्हें इतिहास में भी सीमित कर दिया।*
*निश्चित तौर पर यह सब उनकी जाति के कारण ही हुआ। दरअसल वे उस जाति और समाज का हिस्सा नहीं थे जिनके हाथों में कलम रही है*
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*कलम वालों का इतिहास रहा है कि वे एक तरफा महिमामंडन करते रहे हैं।*
*तमाम तरह के आडंबरों और झूठों का महिमामंडन करने वाली कलम को असली नायकों के बारे में लिखने में शायद लकवा मार गया।*
*लेकिन इस पराक्रमी नायक को बहुजन होने की वजह से इतिहास के पन्नों में जो जगह मिलनी चाहिए थी वह नहीं मिल सकी और महज खानपूर्ति की गई.*
*भारत के इतिहास में कई क्रांतियां हुई हैं, लेकिन इतिहासकारों द्वारा इतिहास को या तो दबाया गया या तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया*
*इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात खत्म करता हूं
शहीद ऊधम सिंह जी के ऐतिहासिक साहस को कोटि कोटि नमन*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
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*भारत के बहुजन,आदिवासी वीर सपूतों एवं वीरांगनाओं की एक लम्बी लिस्ट है, किस-किस की बात करूं, लेकिन बड़े अफ़सोस के साथ कहना चाहूंगा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के आदिवासी नायक एवं बहुजन वीरांगनाओं को शहीदों के रूप में याद ना करना अत्यन्त ही शर्मनाक बात है। जिस प्रकार से आदिवासी नायकों और वीरांगनाओं को मौत दी गई शायद ही कोई उस दर्द का एहसास कर सकता हो। लेकिन उस दर्द में भी आज़ादी की खुशी छुपी हुई थी।*
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*सच अक्सर कड़वा लगता है। इसी लिए सच बोलने वाले भी अप्रिय लगते हैं। सच बोलने वालों*
*🙏✍🏿 को इतिहास के पन्नों में दबाने का प्रयास किया जाता है, पर सच बोलने का सबसे बड़ा लाभ यही*
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*🙏✍🏿 है कि वह खुद पहचान कराता है और घोर अंधेरे में भी चमकते तारे की तरह दमका देता है। सच बोलने वाले से लोग भले ही घृणा करें,पर उसके तेज के सामने झुकना ही पड़ता है।*
*इतिहास के पन्नों पर जमी धूल के नीचेे ऐसे ही एक तेजस्वी क्रांन्तिकारी शहीदे आजम शहीद ऊधम सिंह जी का*
कोटि-कोटि नमन करता हूं मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर
कभी-कभी ख़ामोश घटनाएं ज़्यादा वज़नदार साबित होती हैं।
भारत के इतिहास में कई सामाजिक क्रांतियां हुई हैं, लेकिन इतिहासकारों द्वारा इतिहास को या तो दबाया गया या तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया
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*(साभार-: बहुजन समाज और उसकी राजनिति,मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन समाज का मूवमेंट)*
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कांशीराम साहब जी ने एक एक बहुजन नायक को बहुजन से परिचय कराकर, बहुजन समाज के लिए किए गए कार्य से अवगत कराया। सन 1800 से पहले भारत के बहुजन नायक भारत के बहुजन की पहुँच से दूर थे,
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इसके हमें निश्चय ही मान्यवर कांशीराम साहब जी का शुक्रगुजार होना चाहिए जिन्होंने इतिहास की क्रब में दफन किए गए बहुजन नायक/नायिकाओं के व्यक्तित्व को सामने लाकर समाज में प्रेरणा स्रोत जगाया।
इसका पूरा श्रेय कांशीराम साहब जी को ही जाता है कि उन्होंने जन जन तक गुमनाम बहुजन नायकों को पहुंचाया,
मां कांशीराम साहब के बारे में जान कर मुझे भी लगा कि गुमनाम बहुजन नायकों के बारे में लिखा जाए।
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*तमन्ना सच्ची है, तो रास्ते मिल जाते हैं।*
*तमन्ना झूठी है,तो बहाने मिल जाते हैं।।*
*जिसकी जरूरत है रास्ते उसी को खोजने होंगे।*
*निर्धनों का धन उनका अपना संगठन है।*
*ये मेरे बहुजन समाज के लोगों अपने संगठन*
*अपने झंडे को मजबूत करों*
*शिक्षित हो संगठित हो , संघर्ष करो*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*अम्बेडकरवादी भाईयों, बहनो,को सप्रेम जयभीम! सप्रेम जयभीम !!*
*सप्रेम जयभीम !!!*
*डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने*
*कहा है*
*“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी*
*शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रे मिलती*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती*
*है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”*
*शिक्षित हो संगठित हो , संघर्ष करो*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
*अम्बेडकरवादी भाईयों, बहनो,को सप्रेम जयभीम! सप्रेम जयभीम !!*
*सप्रेम जयभीम !!!*
*डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने*
*कहा है*
*“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी*
*शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रे मिलती*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती*
*है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”*
*इसलिए मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर*
*आप लोगो को इतिहास के उन पन्नों से रूबरू कराने की कोशिश कर रहा हूं*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*जिन पन्नों से बहुजन समाज का सम्बन्ध है*
*जो पन्ने गुमनामी के अंधेरों में खो गए*
*और उन पन्नों पर धूल जम गई है,*
*उन पन्नों से धूल हटाने की कोशिश कर रहा हूं*
*इस मुहिम में आप लोगों मेरा साथ दे, सकते हैं*
*✍✍✍✍✍✍✍*
*पता नहीं क्यूं बहुजन समाज के महापुरुषों के बारे*
*कुछ भी लिखने या प्रकाशित करते समय “भारतीय*
*जातिवादी मीडिया” की कलम से स्याही सूख जाती है*
*इतिहासकारों की बड़ी*
*विडम्बना ये रही है,कि*
*उन्होंने बहुजन नायकों के*
*योगदान को इतिहास में जगह* *नहीं दी*
*इसका सबसे बड़ा कारण*
*जातिगत भावना से ग्रस्त होना*
*एक सबसे बड़ा कारण है*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*इसी तरह के तमाम ऐसे बहुजन नायक हैं,*
*जिनका योगदान कहीं दर्ज न हो पाने से वो इतिहास के पन्नों में गुम* *हो गए.*
*उन तमाम बहुजन नायकों को*
*मैं कोटि-कोटि नमन करता हूं*
*जय भीम जय भारत*
*नमो बुद्धाय*
*जय जंगल जय जोहार*
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नमो बुद्धाय
जय रविदास
जय कबीर
जय भीम
जय नारायण गुरु
जय माता रमाबाई अंबेडकर जी
जय सावित्रीबाई फुले
जय ऊदा देवी पासी जी
जी झलकारी बाई
जय बिरसा मुंडा
जय बाबा घासीदास
जय संत गाडगे बाबा
जय बिरसा मुंडा
जय छत्रपति शाहूजी महाराज
जय शिवाजी महाराज
जय काशीराम साहब
जय मातादीन भंगी जी
जय पेरियार ललई सिंह यादव
*अमित गौतम*
*क्वारडिनेटर*
*बामसेफ*
*युवा सामाजिक*
*कार्यकर्ता*
*बहुजन समाज*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
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