Thursday, August 2, 2018

अण्णा भाऊ साठे जंयती ,1,अगस्त

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*1,अगस्त,1920*
*इतिहास के पन्नों से*
*वो थे इसलिए आज हम हैं*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*बहुजन मराठी समाज सुधारक ,लोक कवि,बहुजन क्रांति के पुरोधा,साहित्यि सम्राट,अण्णा भाऊ साठे जी के 98 वें जन्मदिवस पर सभी देशवासियों को लख-लख बधाईया और मंगलकामनांए*
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*अण्णाभाऊ जी का पूरा नाम तुकाराम भाऊ साठे था. इनका जन्म 1 अगस्त,1920 को सांगली जिले के वाटेगाँव महाराष्ट्र में हुआ था.इनके पिता का नाम भाऊराव जी और माता का नाम वालूबाई जी था.आपका विवाह जयवंती बाई से हुआ था. शुरू में आप बम्बई के घाटकोपर के चिराग नगर की एक चाल में रहा करते थे.*
*साठे एक अस्पृश्यता मांग(मातंग) समाज में पैदा हुए बहुजन थे,*
*अण्णा भाऊ साठे जी ने अपनी कविता,कहानी और नाटकों से दलित-शोषितों को उनके अस्मिता की जुबान दी थी.*
*उन्होंने 'लोकयुध्द' के साप्ताहिक रिपोर्टर के तौर पर भी काम किया था.अण्णाभाऊ के क्रन्तिकारी काव्य  की शोहरत *रूस,जर्मनी,पोलेंड आदि देशो तक पहुंची थी.उनकी किताबों के वहां अनुवाद वहां हुए थे.*
*इन मुल्कों में वे शोषितों के साहित्यकार के रूप में पहिचाने जाने लगे थे.उन्हें इन देशों से निमंत्रण आते थे.सन 1948  में उन्हें विश्व साहित्य परिषद् का निमंत्रण मिला था. मगर, भारत सरकार ने उन्हें इजाजत नहीं दी थी.*
*रूसी राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किया गया था*
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*बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर जी और अण्णा भाऊ साठे*
    *🔼 अण्णा भाऊ साठे जी बोधिसत्व बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर जी के बहुत बड़े प्रसंशक थे।*
*बाबा साहेब के निधन पर दलित-शोषितों के लिए अण्णाभाऊ ने शाहिर की थी*
*जग बदल घालूनी घाव-सांगुनी गेले मला भीमराव.*
  *गुलामगिरिच्या  चिखलात- रुतूनी  बसला  एरावत.*
  *अंग   झाडुनी   निघ   बाहेरी-  घे   बिनीवरती  घाव.*
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       *नि:संदेह, बाबा साहेब डा.भीमराव आम्बेडकर जी के कार्यों ने बहुजन समाज के साहित्यकारों, लेखकों, कवियों और नाटककारों को सामाजिक जागरूकता के लिए काम करने की प्रेरणा दी थी.*
*सन 1959 में अण्णा भाऊ ने अपनी मशहूर किताब 'फकीरा' लिखी.यह ग्रन्थ सन 1910 में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करने वाले मांग समाज के क्रांतिवीर फकीरा के संघर्ष पर था. इस पुस्तक को अण्णाभाऊ ने डा.भीमराव आम्बेडकर जी को समर्पित किया था.*
*उपन्यास 'फकीरा' को वर्ष 1 9 61 और पूर्व में वरिष्ठ साहित्यिक विजेता में राज्य का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास पुरस्कार भी मिला। सी खांडेकर ने उपन्यास की भी प्रशंसा की।*
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*अण्णाभाऊ साठे जी के कलम की शोहरत महाराष्ट्र के सिने-जगत में तो थी ही, हिंदी सिने-जगत भी इससे अछूता नहीं था.उनकी 10 से अधिक कहानियों पर फिल्मे बनी जिसमे 'फकीरा' भी है.*
*याद रहे, अण्णाभाऊ ने इस फिल्म की न सिर्फ पट-कथा लिखी थी वरन, फिल्म के एक किरदार ' सावळया' का रोल भी किया था.*
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*अण्णा भाऊ साठे जी ने 40  के ऊपर उपन्यास लिखे. 300 के आस-पास कहानियां  लिखी.उनके कई काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए.उन्होंने कई नाटक लिखे.यहाँ तक कि उन्होंने कई चित्र-पट कथाएं भी लिखी.उनकी रचनाओं का अनुवाद अंग्रेजी,फ्रेंच आदि कई विदेशी भाषाओँ में हुआ.इसके अलावा  हिंदी,गुजराती,बंगाली,तमिल,मलियाली,उड़िया आदि देशी भाषों में भी हुआ.अण्णाभाऊ को 'इंडो-सोवियत कल्चर सोसायटी' की और से  रूस आने का निमंत्रण मिला था.इस यात्रा का जिक्र उन्होंने अपने सफरनामा 'माझा रशियाचा प्रवास' में किया है.*
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*अपने प्रहार से दुनिया को बदल डालो, ऐसा मुझे भीमराव कह कर गए हैं. हाथी जैसी ताकत होने के बावजूद गुलामी के दलदल में क्यों फंसे रहते हो.जिस्म को झटक कर बाहर निकलो और टूट पड़ो.*
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*स्कूली अनपढ़ होते हुये भी उन्होने पढ़ने-लिखने की न केवल योग्यता हासिल की बल्कि क्रांति का बहुत बड़ा साहित्य भी रचा जो अच्छे-अच्छे ज्ञानपीठियों की मुहंतोड़ जवाब देते थे*
*पुराने समय से ही जातिवाद से ग्रसित समाज ने उन्हें इतिहास में भी सीमित कर दिया।*
*निश्चित तौर पर यह सब उनकी जाति के कारण ही हुआ। दरअसल वे उस जाति और समाज का हिस्सा नहीं थे जिनके हाथों में कलम रही है*
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*कलम वालों का इतिहास रहा है कि वे एक तरफा महिमामंडन करते रहे हैं।*
*तमाम तरह के आडंबरों और झूठों का महिमामंडन करने वाली कलम को असली नायकों के बारे में लिखने में शायद लकवा मार गया।*
*लेकिन इस पराक्रमी नायक को बहुजन होने की वजह से इतिहास के पन्नों में जो जगह मिलनी चाहिए थी वह नहीं मिल सकी और महज खानपूर्ति की गई.*
*भारत के इतिहास में कई क्रांतियां हुई हैं, लेकिन इतिहासकारों द्वारा इतिहास को या तो दबाया गया या तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया*
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*इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात खत्म करता हूं*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।* ...........................................
*भारत के बहुजन,आदिवासी वीर सपूतों एवं वीरांगनाओं की एक लम्बी लिस्ट है, किस-किस की बात करूं, लेकिन बड़े अफ़सोस के साथ कहना चाहूंगा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के आदिवासी नायक एवं बहुजन वीरांगनाओं को शहीदों के रूप में याद ना करना अत्यन्त ही शर्मनाक बात है। जिस प्रकार से आदिवासी नायकों और वीरांगनाओं को मौत दी गई शायद ही कोई उस दर्द का एहसास कर सकता हो। लेकिन उस दर्द में भी आज़ादी की खुशी छुपी हुई थी।*
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*सच अक्सर कड़वा लगता है। इसी लिए सच बोलने वाले भी अप्रिय लगते हैं। सच बोलने वालों*
*🙏✍🏿 को इतिहास के पन्नों में दबाने का प्रयास किया जाता है, पर सच बोलने का सबसे बड़ा लाभ यही*
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*🙏✍🏿 है कि वह खुद पहचान कराता है और घोर अंधेरे में भी चमकते तारे की तरह दमका देता है। सच बोलने वाले से लोग भले ही घृणा करें,पर उसके तेज के सामने झुकना ही पड़ता है।*
*इतिहास के पन्नों पर जमी धूल के नीचेे ऐसे ही एक तेजस्वी क्रांन्तिकारी बहुजन क्रांति के कवि अण्णा भाऊ साठे जी का*
*कोटि-कोटि नमन करता हूं मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर*
*कभी-कभी ख़ामोश घटनाएं ज़्यादा वज़नदार साबित होती हैं।भारत के इतिहास में कई सामाजिक क्रांतियां हुई हैं, लेकिन इतिहासकारों द्वारा इतिहास को या तो दबाया गया या तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया*
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*(साभार-: बहुजन समाज और उसकी राजनिति,मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन समाज का मूवमेंट)*
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*कांशीराम साहब जी ने एक एक बहुजन नायक को बहुजन से परिचय कराकर, बहुजन समाज के लिए किए गए कार्य से अवगत कराया। सन 1800 से पहले भारत के बहुजन नायक भारत के बहुजन की पहुँच से दूर थे,*
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*इसके हमें निश्चय ही  मान्यवर कांशीराम साहब जी का शुक्रगुजार होना चाहिए जिन्होंने इतिहास की क्रब में दफन किए गए बहुजन नायक/नायिकाओं के व्यक्तित्व को सामने लाकर समाज में प्रेरणा स्रोत जगाया।*
*इसका पूरा श्रेय कांशीराम साहब जी को ही जाता है कि उन्होंने जन जन तक गुमनाम बहुजन नायकों को पहुंचाया, मां कांशीराम साहब के बारे में जान कर मुझे भी लगा कि गुमनाम बहुजन नायकों के बारे में लिखा जाए।*
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*तमन्ना सच्ची है, तो रास्ते मिल जाते हैं।*
*तमन्ना झूठी है,तो बहाने मिल जाते हैं।।*
*जिसकी जरूरत है रास्ते उसी को खोजने होंगे।*
*निर्धनों का धन उनका अपना संगठन है।*
*ये मेरे बहुजन समाज के लोगों अपने संगठन*
*अपने झंडे को मजबूत करों*
*शिक्षित हो संगठित हो , संघर्ष करो*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*अम्बेडकरवादी भाईयों, बहनो,को सप्रेम जयभीम! सप्रेम जयभीम !!*
*सप्रेम जयभीम !!!*
*डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने*
*कहा है*
*“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी*
*शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रे मिलती*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती*
*है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”*
*शिक्षित हो संगठित हो , संघर्ष करो*
*साथियों हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हमारे पूर्वजों का संघर्ष और बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।*
*अम्बेडकरवादी भाईयों, बहनो,को सप्रेम जयभीम! सप्रेम जयभीम !!*
*सप्रेम जयभीम !!!*
*डॉ. बाबासाहेब आंबडेकर ने*
*कहा है*
*“जिस समाज का इतिहास नहीं होता, वह समाज कभी भी*
*शासक नहीं बन पाता… क्योंकि इतिहास से प्रे मिलती*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती*
*है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है ”*
*इसलिए मैं अमित गौतम जनपद-रमाबाई नगर कानपुर*
*आप लोगो को इतिहास के उन पन्नों से रूबरू कराने की कोशिश कर रहा हूं*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*जिन पन्नों से बहुजन समाज का सम्बन्ध है*
*जो पन्ने गुमनामी के अंधेरों में खो गए*
*और उन पन्नों पर धूल जम गई है,*
*उन पन्नों से धूल हटाने की कोशिश कर रहा हूं*
*इस मुहिम में आप लोगों मेरा साथ दे, सकते हैं*
*✍✍✍✍✍✍✍*
*पता नहीं क्यूं बहुजन समाज के महापुरुषों के बारे*
*कुछ भी लिखने या प्रकाशित करते समय “भारतीय*
*जातिवादी मीडिया” की कलम से स्याही सूख जाती है*
*इतिहासकारों की बड़ी*
*विडम्बना ये रही है,कि*
*उन्होंने बहुजन नायकों के*
*योगदान को इतिहास में जगह* *नहीं दी*
*इसका सबसे बड़ा कारण*
*जातिगत भावना से ग्रस्त होना*
*एक सबसे बड़ा कारण है*
*🙏🙏🌹🌹🌹🙏🙏*
*इसी तरह के तमाम ऐसे बहुजन नायक हैं,*
*जिनका योगदान कहीं दर्ज न हो पाने से वो इतिहास के पन्नों में गुम* *हो गए.*
*उन तमाम बहुजन नायकों को*
*मैं कोटि-कोटि नमन करता हूं*
*जय भीम       जय भारत*
              *नमो बुद्धाय*
  *जय जंगल जय जोहार*
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नमो बुद्धाय
जय रविदास
जय कबीर
जय भीम
जय नारायण गुरु
जय माता रमाबाई अंबेडकर जी
जय सावित्रीबाई फुले
जय ऊदा देवी पासी जी
जी झलकारी बाई
जय बिरसा मुंडा
जय बाबा घासीदास
जय संत गाडगे बाबा
जय बिरसा मुंडा
जय छत्रपति शाहूजी महाराज
जय शिवाजी महाराज
जय काशीराम साहब
जय मातादीन भंगी जी
जय पेरियार ललई सिंह यादव
*अमित गौतम*
              *क्वारडिनेटर*
                 *बामसेफ*
             *युवा सामाजिक*
                *कार्यकर्ता*          
              *बहुजन समाज*

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